ऑपरेशन नया सवेरा: 167.18 ग्राम चिट्टा बरामद, 19 आरोपी गिरफ्तार, कांगड़ा पुलिस ने ध्वस्त किया अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क









कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश को नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के तहत कांगड़ा पुलिस ने एक बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा शुरू किए गए एंटी-चिट्टा जन-आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए कांगड़ा पुलिस ने "ऑपरेशन नया सवेरा" के माध्यम से एक संगठित अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान के तहत पुलिस ने अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से कुल 167.18 ग्राम हेरोइन (चिट्टा) बरामद की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह केवल एक सामान्य बरामदगी का मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश में सक्रिय एक बड़े नशा तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में की गई महत्वपूर्ण कार्रवाई है।


पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन पंजाब के जालंधर निवासी अभिषेक साहोता द्वारा किया जा रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार उसने कांगड़ा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चिट्टा वितरण के लिए कई संपर्क बिंदु और आपूर्ति केंद्र स्थापित कर रखे थे। इन केंद्रों के माध्यम से नशे की खेप विभिन्न इलाकों तक पहुंचाई जाती थी। नेटवर्क का संचालन सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था, जिसमें सप्लायर, कूरियर, स्थानीय वितरक और उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने वाले कई अन्य लोग शामिल थे।


कांगड़ा पुलिस ने इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए लंबे समय तक तकनीकी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर निगरानी रखी। इसके बाद हिमाचल प्रदेश, पंजाब और चंडीगढ़ में एक समन्वित अभियान चलाया गया। अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर नेटवर्क से जुड़े कई अहम लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मुख्य सहयोगी, वितरक, कूरियर और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े अन्य सदस्य शामिल हैं। इस कार्रवाई ने नशा तस्करी के उस तंत्र को गहरा झटका दिया है, जो लंबे समय से युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने का काम कर रहा था।


पुलिस ने बताया कि इस गिरोह से जुड़े कुल 23 मामले एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज किए गए हैं। यह तथ्य दर्शाता है कि नेटवर्क काफी समय से सक्रिय था और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहुंच बनाए हुए था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 167.18 ग्राम चिट्टा बरामद करने के अलावा 18 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं। इनमें मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस शामिल हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इन उपकरणों से नेटवर्क के अन्य सदस्यों, वित्तीय लेन-देन और तस्करी के तरीकों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इसके अतिरिक्त तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे एक मालवाहक वाहन को भी जब्त किया गया है।


इस अभियान के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता 5 जून को मिली, जब गौरव साहोता, हनी पुत्र सोमनाथ और हनी कुमार पुत्र ऋषि कुमार को गिरफ्तार किया गया। जांच में खुलासा हुआ कि हनी कुमार नेटवर्क के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक था और वह लगातार हेरोइन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा था। पुलिस का मानना है कि इन गिरफ्तारियों से नेटवर्क की कई महत्वपूर्ण कड़ियां उजागर हुई हैं और आगे की जांच में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।


मामले का सबसे चिंताजनक पहलू वित्तीय जांच के दौरान सामने आया है। पुलिस को पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग 80 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। इनमें जनवरी 2026 से अब तक करीब 39 लाख रुपये के लेन-देन शामिल बताए गए हैं। पुलिस अब इस आर्थिक नेटवर्क की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि तस्करी से अर्जित धन किन माध्यमों से इधर-उधर किया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय जांच से नेटवर्क के कई अन्य सदस्यों और सहयोगियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।


"ऑपरेशन नया सवेरा" की एक विशेष उपलब्धि इसका सामाजिक और मानवीय पक्ष भी है। केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने तक सीमित न रहकर कांगड़ा पुलिस ने नशे की समस्या के मूल कारणों को समझने और प्रभावित लोगों को मुख्यधारा में वापस लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जांच के दौरान पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े 184 चिट्टा उपभोक्ताओं की पहचान की है। इन लोगों को अपराधी के बजाय नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों के रूप में देखते हुए जिला प्रशासन के सहयोग से उनके लिए विशेष परामर्श, नशामुक्ति उपचार, पुनर्वास और फॉलोअप सहायता कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।


पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज, परिवार और विभिन्न सरकारी संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी सोच के तहत ऑपरेशन नया सवेरा को केवल एक पुलिस अभियान न बनाकर एक सामाजिक पहल का स्वरूप दिया गया है। इसका उद्देश्य न केवल तस्करों के नेटवर्क को तोड़ना है, बल्कि नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं को नया जीवन और नई दिशा प्रदान करना भी है।


कांगड़ा पुलिस ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि यदि उन्हें अपने क्षेत्र में नशा तस्करी या मादक पदार्थों की अवैध गतिविधियों से संबंधित कोई जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि जनता के सहयोग से ही नशा तस्करी के खिलाफ इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।


कांगड़ा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नशा तस्करों और उनके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। पुलिस का कहना है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। "ऑपरेशन नया सवेरा" को प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रही सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने यह संदेश दिया है कि नशा तस्करी के कारोबार में शामिल लोगों के लिए हिमाचल प्रदेश में अब कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है।


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