इंदौरा के तारा खड्ड में 31 भेड़ों की मौत, चुराह के भेड़पालकों को भारी नुकसान
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के उपमंडल इंदौरा के तारा खड्ड क्षेत्र में शनिवार शाम एक दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई, जहां घास चरने के दौरान अचानक भेड़ों का एक बड़ा झुंड बीमार पड़ गया और देखते ही देखते 31 भेड़ों की मौत हो गई। इस घटना से न केवल प्रभावित भेड़पालकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि पूरे क्षेत्र में भी चिंता और दहशत का माहौल बन गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृत भेड़ों में आजाद मुहम्मद की 17, गुलाम नवी की 10 और लेनू राम की 5 भेड़ें शामिल हैं। ये सभी भेड़पालक आपस में भाई बताए जा रहे हैं और जिला चम्बा के चुराह क्षेत्र के निवासी हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग हर साल की तरह इस बार भी मौसमी प्रवास (माइग्रेशन) के तहत अपने भेड़ों के झुंड के साथ इंदौरा क्षेत्र में चराई के लिए पहुंचे हुए थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, शनिवार शाम को भेड़ें तारा खड्ड के किनारे खुले क्षेत्र में घास चर रही थीं। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन अचानक कुछ भेड़ों में अजीब लक्षण दिखाई देने लगे। देखते ही देखते कई भेड़ें जमीन पर गिर पड़ीं और तड़पने लगीं। भेड़पालकों के मुताबिक, स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला और कुछ ही समय में 31 भेड़ों की मौत हो गई।
भेड़पालकों ने बताया कि इस तरह की घटना उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। उनका कहना है कि भेड़ें पूरी तरह स्वस्थ थीं और नियमित रूप से चराई कर रही थीं, लेकिन अचानक इस तरह से बीमार पड़ना और मौत होना कई सवाल खड़े कर रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि संभवतः भेड़ों ने जहरीली घास या किसी दूषित पदार्थ का सेवन कर लिया होगा, जिसके कारण यह घटना हुई।
हालांकि राहत की बात यह रही कि झुंड की बाकी भेड़ें कुछ समय बाद सामान्य हो गईं। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कोई विशेष क्षेत्र या स्थान पर ही ऐसा कोई जहरीला तत्व मौजूद रहा होगा, जिससे कुछ भेड़ें प्रभावित हुईं, जबकि अन्य बच गईं।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) इंदौरा सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पशु चिकित्सा विभाग की टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया है। टीम द्वारा मृत भेड़ों का निरीक्षण किया जा रहा है और आवश्यक सैंपल भी लिए जा रहे हैं, ताकि मौत के असली कारणों का पता लगाया जा सके।
एसडीएम के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर जहरीली घास या दूषित पदार्थ के सेवन की आशंका जताई जा रही है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित भेड़पालकों को हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।
प्रशासन ने भेड़पालकों को आश्वस्त किया है कि उन्हें हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा और नियमानुसार मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं, ताकि जल्द से जल्द प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
इस घटना के बाद क्षेत्र के अन्य भेड़पालकों में भी चिंता बढ़ गई है। कई लोग अब अपने पशुओं को चराने के दौरान अधिक सतर्कता बरत रहे हैं और संदिग्ध स्थानों से दूर रहने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की घटनाओं के कारणों का पता नहीं लगाया गया, तो भविष्य में और भी नुकसान हो सकता है।
पशु विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी और नदी किनारे वाले क्षेत्रों में कई बार जहरीली वनस्पतियां उग जाती हैं, जिनका सेवन पशुओं के लिए घातक साबित हो सकता है। इसके अलावा, यदि पानी या जमीन में किसी प्रकार का रासायनिक प्रदूषण हो, तो भी इस तरह की घटनाएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में नियमित जांच और जागरूकता बेहद जरूरी है।
इस घटना ने एक बार फिर से पशुपालन से जुड़े लोगों की चुनौतियों को उजागर किया है। हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग पशुपालन और भेड़-बकरी पालन पर निर्भर हैं। ऐसे में इस तरह की अचानक होने वाली घटनाएं उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद नुकसानदायक साबित होती हैं।
स्थानीय लोगों और भेड़पालकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की गहन जांच करवाई जाए और यदि कहीं जहरीली घास या अन्य खतरनाक तत्व पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत हटाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल, प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग की टीमें मामले की जांच में जुटी हुई हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही जांच पूरी होगी, भेड़ों की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो पाएगा। तब तक के लिए इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और प्रभावित भेड़पालक अपने नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।
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