हिमाचल में 8 कुख्यात नशा तस्कर डिटेन, PIT-NDPS एक्ट के तहत अब तक 96 आदतन आरोपी हिरासत में

 हिमाचल में 8 कुख्यात तस्करों पर निवारक निरोध, PIT-NDPS एक्ट के तहत अब तक 96 आदतन आरोपी हिरासत में


शिमला। मुख्यमंत्री Thakur Sukhvinder Singh Sukhu द्वारा 15 नवंबर 2025 को प्रारंभ किए गए ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ के तहत हिमाचल प्रदेश को चिट्टा मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ राज्य पुलिस ने संगठित नशा तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध व्यापक और समन्वित अभियान तेज कर दिया है। इस विशेष कार्रवाई के अंतर्गत PIT-NDPS Act के कड़े कानूनी प्रावधानों का उपयोग करते हुए आठ कुख्यात और कथित रूप से संगठित तस्करों के खिलाफ निवारक निरोध (Preventive Detention) आदेश जारी किए गए हैं।




पुलिस विभाग के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, यह कार्रवाई राज्यभर में खुफिया सूचनाओं के विश्लेषण, पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की समीक्षा तथा कानूनी परामर्श के बाद की गई। इस चरण में शिमला जिला से पांच आरोपियों को हिरासत में लिया गया, जबकि देहरा, नूरपुर और ऊना से एक-एक आरोपी के विरुद्ध निरोधात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई। संबंधित जिलों की पुलिस टीमों ने आपसी समन्वय, निगरानी तंत्र और विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए इन तस्करों को चिन्हित किया।


प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित ड्रग सप्लाई नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने की रणनीति का हिस्सा है। आरोप है कि हिरासत में लिए गए आरोपी कथित तौर पर मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े थे और विभिन्न क्षेत्रों में नेटवर्क के माध्यम से चिट्टा की सप्लाई में संलिप्त रहे हैं। ऐसे मामलों में पारंपरिक गिरफ्तारी के बाद जमानत पर छूटकर पुनः सक्रिय होने की आशंका को देखते हुए निवारक निरोध का सहारा लिया गया है।


आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 तक राज्य में 65 नशा तस्करों को PIT-NDPS एक्ट के तहत हिरासत में लिया जा चुका था। वर्ष 2026 में अब तक 31 और आदतन तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इस प्रकार कुल मिलाकर 96 कथित आदतन और संगठित तस्करों को इस अधिनियम के अंतर्गत निरुद्ध किया जा चुका है। पुलिस का दावा है कि यह संख्या राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।






PIT-NDPS एक्ट के अंतर्गत निवारक निरोध का उद्देश्य उन व्यक्तियों की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाना है, जिनकी कथित संलिप्तता अवैध मादक पदार्थों के व्यापार में बार-बार सामने आती रही है। यह कानून प्रशासन को ऐसे मामलों में निरोधात्मक आदेश जारी करने का अधिकार देता है, जिससे संगठित नेटवर्क की कार्यप्रणाली बाधित की जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रावधान के उपयोग से आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान उत्पन्न हुआ है और कई क्षेत्रों में ड्रग नेटवर्क की सक्रियता कम हुई है।


इसके अतिरिक्त, हिरासत में लिए गए आरोपियों की चल और अचल संपत्तियों की विस्तृत जांच भी प्रारंभ कर दी गई है। प्रवक्ता के अनुसार, यदि जांच में यह पाया जाता है कि कोई संपत्ति अवैध नशा कारोबार से अर्जित धन से खरीदी गई है, तो उसे कानून के अनुरूप जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि तस्करों के वित्तीय ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करना भी है, ताकि वे भविष्य में नेटवर्क पुनः खड़ा न कर सकें।


पुलिस का कहना है कि संगठित नशा तस्करी केवल आपराधिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौती है। विशेषकर युवाओं में चिट्टा के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए व्यापक स्तर पर रोकथाम, जागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक हो गई है। ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ के तहत स्कूलों, कॉलेजों और पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री की अपील को दोहराते हुए पुलिस विभाग ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से आग्रह किया है कि यदि उन्हें चिट्टा या अन्य मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित कोई भी जानकारी मिले तो तुरंत 112 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने का आश्वासन दिया गया है।


पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भी आदतन और कुख्यात तस्करों के विरुद्ध इसी प्रकार की सख्त और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त वातावरण सुनिश्चित करना है। लगातार चल रहे इस अभियान को प्रदेश में संगठित नशा तस्करी के विरुद्ध निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।


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