हिमाचल प्रदेश में डिजिटल 'क्लीन-अप': 1 जनवरी 2026 से स्कूलों में मोबाइल और गैजेट्स पर पूर्ण प्रतिबंध





शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के शिक्षा तंत्र में अनुशासन को फिर से स्थापित करने और छात्रों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने की दिशा में एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा जारी नवीनतम आदेशों के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के भीतर छात्रों के लिए मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।

यह निर्णय केवल कक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब पूरे स्कूल परिसर में लागू होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर छात्रों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, जिसमें स्कूल से निष्कासन (Rustication) तक की कार्रवाई शामिल है।

क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित?

शिक्षा विभाग ने 22 दिसंबर 2025 को जारी अपनी अधिसूचना में उन उपकरणों की सूची स्पष्ट की है जिन पर पाबंदी लगाई गई है:

  • सभी प्रकार के मोबाइल फोन और स्मार्टवॉच।

  • ईयरबड्स, हेडफोन और पोर्टेबल म्यूजिक प्लेयर।

  • गैर-शैक्षणिक टैबलेट और हैंड-हेल्ड गेमिंग डिवाइस।

  • कोई भी ऐसा उपकरण जो फोटो/वीडियो रिकॉर्डिंग या सूचना प्रसारण (Broadcasting) करने में सक्षम हो।

यह सख्त निर्देश हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा संहिता के पैरा 2.32 (B) में किए गए संशोधन के बाद लागू किए जा रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बार-बार नियम तोड़ने वाले छात्रों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी।

शिक्षकों के लिए भी कड़े नियम

ऐसा नहीं है कि यह पाबंदी केवल छात्रों पर है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों के लिए भी लक्ष्मण रेखा खींच दी है।

  1. उपयोग की सीमा: शिक्षक स्कूल समय के दौरान सोशल मीडिया, गेमिंग या मनोरंजन के लिए फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

  2. साइलेंट मोड: ड्यूटी के दौरान फोन को साइलेंट मोड पर रखना अनिवार्य होगा।

  3. अपवाद: मोबाइल का उपयोग केवल 'डिजिटल लर्निंग', अटेंडेंस (हाजिरी) लगाने या अन्य आधिकारिक कार्यों के लिए ही किया जा सकेगा।

  4. रिकॉर्डिंग पर रोक: बिना पूर्व अनुमति के स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी।

सरकार का तर्क: एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य

हिमाचल सरकार और शिक्षा विभाग का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में स्कूल परिसर में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के बढ़ते उपयोग से छात्रों की एकाग्रता (Concentration) में भारी कमी आई है। मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके सामाजिक व्यवहार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

सरकार का उद्देश्य स्कूलों में एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां छात्र तकनीक के बजाय किताबों और खेलकूद पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकें। इससे पहले सितंबर 2025 में केवल 'क्लासरूम' के भीतर फोन पर रोक लगाई गई थी, लेकिन अपेक्षित परिणाम न मिलने के कारण अब इसे पूरे स्कूल परिसर में लागू कर दिया गया है।

प्रधानाचार्यों को मिली जिम्मेदारी

इन नए नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी स्कूल के प्रधानाचार्यों और संस्थान प्रमुखों को सौंपी गई है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से औचक निरीक्षण करें और उल्लंघन पाए जाने पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

एक बड़ा बदलाव या सख्त चुनौती?

हिमाचल प्रदेश सरकार के इस फैसले ने प्रदेश में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां विशेषज्ञ इसे भविष्य की पीढ़ी को 'डिजिटल एडिक्शन' से बचाने वाला एक साहसी कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ अभिभावकों का तर्क है कि आपातकालीन स्थिति में बच्चों से संपर्क करने का कोई वैकल्पिक रास्ता होना चाहिए।

बहरहाल, 1 जनवरी 2026 से हिमाचल के सरकारी स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह 'डिजिटल डिटॉक्स' शिक्षा के परिणामों में कितनी सुधार लाता है।


Post a Comment

Previous Post Next Post

Contact Form