मंडी में दर्दनाक हादसा: पानी पीने रुके श्रद्धालुओं पर गिरी चट्टान, महिला की मौत, सात घायल
मंडी: हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टानें गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। शुक्रवार को जिला मंडी के जोगिंद्रनगर उपमंडल के गुम्मा क्षेत्र में ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने एक श्रद्धालु परिवार की धार्मिक यात्रा को पलभर में मातम में बदल दिया। कुल्लू जिले से मां सिमसा मंदिर के दर्शन के लिए निकला परिवार रास्ते में पानी पीने के लिए रुका था, तभी पहाड़ी से अचानक भारी चट्टान नीचे आ गिरी। इस हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के सात अन्य सदस्य घायल हो गए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोग तुरंत राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए।
मृतका की पहचान रामेश्वरी शर्मा, पत्नी गोपालकृष्ण, निवासी सुलतानपुर, जिला कुल्लू के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि परिवार धार्मिक आस्था के साथ मां सिमसा मंदिर के दर्शन के लिए रवाना हुआ था। परिवार दो अलग-अलग वाहनों में सवार होकर यात्रा कर रहा था। शुक्रवार सुबह लगभग 10 बजे जब वे जोगिंद्रनगर उपमंडल के गुम्मा क्षेत्र में पहुंचे तो सभी सदस्य सड़क किनारे स्थित एक स्थान पर पानी पीने और कुछ देर विश्राम करने के लिए रुक गए। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि अगले ही कुछ सेकंड में यह पड़ाव एक दर्दनाक हादसे में बदल जाएगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक पहाड़ी से तेज आवाज के साथ एक विशाल चट्टान टूटकर नीचे आ गिरी। चट्टान इतनी तेजी से नीचे आई कि वहां मौजूद लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थान पर भागने का मौका तक नहीं मिला। कई लोग इसकी चपेट में आ गए। हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और परिजन घायल सदस्यों को बचाने के लिए दौड़ पड़े। आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने भी बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया और प्रशासन व पुलिस को घटना की सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और स्थानीय राहत दल घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की सहायता से सभी घायलों को तुरंत मलबे और चट्टानों के बीच से निकालकर एंबुलेंस के माध्यम से नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार सभी घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। कुछ घायलों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि अन्य का उपचार प्राथमिक स्तर पर किया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान भी रेफर किया जा सकता है।
पुलिस ने मृतका के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी का हिस्सा कमजोर हो गया था, जिससे अचानक चट्टान टूटकर नीचे आ गई। हालांकि प्रशासन पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।
हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मानसून के दौरान लगातार भूस्खलन, सड़क धंसने और चट्टानें गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, शिमला, चंबा और सिरमौर सहित कई जिलों में बारिश के कारण पहाड़ों की स्थिरता प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार वर्षा से मिट्टी और चट्टानों के बीच पकड़ कमजोर हो जाती है, जिसके कारण अचानक बड़े-बड़े पत्थर और चट्टानें नीचे गिरने लगती हैं। यही वजह है कि बरसात के मौसम में पहाड़ी मार्गों पर यात्रा के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो जाता है।
प्रशासन ने लोगों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि बारिश के दौरान पहाड़ी मार्गों पर अनावश्यक रूप से वाहन न रोकें। यदि विश्राम करना आवश्यक हो तो केवल सुरक्षित और चिन्हित स्थानों पर ही रुकें। विशेष रूप से उन स्थानों से बचें जहां भूस्खलन या चट्टान गिरने की आशंका रहती है। इसके अलावा मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने और खराब मौसम में यात्रा टालने की भी सलाह दी गई है।
यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी एडवाइजरी का पालन करना, संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क रहना और सुरक्षित स्थानों पर ही रुकना ऐसी घटनाओं से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है। वहीं, स्थानीय लोगों द्वारा दिखाई गई तत्परता और राहत कार्य में सहयोग ने घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटे हैं तथा घायलों के बेहतर उपचार के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
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