597 रुपये की खरीद पर 15 रुपये कैरी बैग वसूली पड़ी भारी, शिमला में मेगा मार्ट पर 5 हजार का जुर्माना
शिमला: जिला उपभोक्ता आयोग शिमला ने कथित तौर पर ग्राहकों से कैरी बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूलने के मामले में विशाल मेगा मार्ट को दोषी ठहराया है। आयोग ने इस प्रथा को अनुचित व्यापार करार देते हुए उपभोक्ताओं से लिए गए 15 रुपये वापस करने के आदेश दिए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आयोग ने मानसिक उत्पीड़न और कानूनी खर्च के रूप में 5 हजार रुपये की एकमुश्त राशि भी शिकायतकर्ताओं को देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मार्ट को यह आदेश 45 दिनों के भीतर लागू करने को कहा गया है।
मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने कहा कि वस्तु विक्रय अधिनियम 1930 की धारा 36(5) के तहत विक्रेता की जिम्मेदारी होती है कि वह सामान को डिलिवरेबल स्टेट यानी ले जाने योग्य स्थिति में उपलब्ध कराए।
आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आमतौर पर छोटे विक्रेता भी सामान को कागज या लिफाफे में पैक करके देते हैं, ऐसे में बड़े प्रतिष्ठानों द्वारा कैरी बैग के लिए शुल्क वसूलना उपभोक्ताओं के साथ अनुचित व्यवहार माना जा सकता है।
शिकायतकर्ताओं शंकर शर्मा और नरेंद्र मेहता के अनुसार, 31 अक्तूबर 2025 को छोटा शिमला स्थित मेगा मार्ट से 597 रुपये का घरेलू सामान खरीदा गया था, जिसमें बिल में 15 रुपये कैरी बैग के लिए जोड़े गए। विरोध करने पर स्टोर प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर दुर्व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इसके बाद उपभोक्ताओं ने आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी।
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