शिमला में 72 शिक्षक जांच के दायरे में, 28 प्रधानाचार्य भी शामिल; POCSO समेत गंभीर आरोपों पर शिक्षा विभाग सख्त
शिमला: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कथित भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभागीय कार्रवाई के तहत प्रदेशभर में 72 शिक्षक इस समय जांच के दायरे में हैं। इस कदम को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
हाल ही में शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में इन मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि लंबित मामलों की जांच में तेजी लाई जाए और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मंत्री ने दो टूक कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनैतिक आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दायरे में आए शिक्षकों में सबसे अधिक संख्या प्रधानाचार्यों की है, जिनकी संख्या 28 बताई जा रही है। इसके अलावा प्रवक्ता, टीजीटी, मुख्य अध्यापक और डीपीई स्तर के कर्मचारी भी इस सूची में शामिल हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि विभिन्न स्तरों पर शिकायतें सामने आई हैं।
मामलों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई आरोप आपराधिक प्रकृति के बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, 10 शिक्षकों पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं, जबकि 3 पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। इसके अतिरिक्त कुछ मामलों में छात्रों की कथित पिटाई, शराब के नशे में स्कूल आने, गबन और रिश्वतखोरी जैसे आरोप भी शामिल हैं। 7 शिक्षकों के लंबे समय तक बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की शिकायतें भी जांच में शामिल बताई जा रही हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि सभी मामलों की जांच स्थापित प्रक्रिया के तहत की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।
बीते दो महीनों के दौरान भी शिक्षा विभाग ने 11 शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इनमें बर्खास्तगी और जबरन सेवानिवृत्ति जैसे कदम शामिल हैं। एक मामले में इतिहास के एक प्रवक्ता को छात्राओं के कथित शारीरिक शोषण के आरोप में दोषी पाए जाने पर सेवा से हटाया गया, जबकि गणित के एक प्रवक्ता को कथित रिश्वत मांगने के मामले में दोष सिद्ध होने पर जबरन सेवानिवृत्त किया गया।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को पूरे प्रदेश के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि अब सरकारी स्कूलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता को गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो, ताकि ईमानदारी से कार्य कर रहे शिक्षकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सरकार का फोकस स्कूलों में सुरक्षित, अनुशासित और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। इसके लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्ती से न केवल व्यवस्था में सुधार आएगा, बल्कि शिक्षकों की जवाबदेही भी बढ़ेगी और अभिभावकों व छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।
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