शिमला में 25 दिन के भीतर 18 संगठित नशा तस्करों पर शिकंजा, PIT NDPS Act के तहत 3 माह की जेल

 

शिमला में 25 दिनों में 18 आदतन नशा तस्कर हिरासत में, PIT NDPS Act के तहत 3 माह की डिटेंशन — जिला पुलिस की बड़ी कार्रवाई

शिमला। नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य करते हुए जिला पुलिस शिमला ने बीते 25 दिनों के भीतर 18 आदतन और कथित तौर पर संगठित रूप से नशा तस्करी में संलिप्त आरोपियों को PIT NDPS Act के तहत डिटेंशन आदेश जारी कर 3 माह के लिए जेल भेजने की कार्रवाई अमल में लाई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई ऐसे आरोपियों के विरुद्ध की गई है, जो पूर्व में भी नशा तस्करी के मामलों में संलिप्त पाए गए थे और जमानत पर बाहर आकर पुनः अवैध गतिविधियों में सक्रिय हो रहे थे।







पुलिस विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इन सभी मामलों में संबंधित आरोपियों की गतिविधियों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया गया। आरोप है कि ये व्यक्ति कथित तौर पर संगठित नेटवर्क के माध्यम से मादक पदार्थों की आपूर्ति और वितरण में संलिप्त थे। जिला पुलिस द्वारा प्रत्येक आरोपी की पृष्ठभूमि, पूर्व आपराधिक इतिहास और चल रहे मामलों का विश्लेषण कर प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे सक्षम प्राधिकारी को भेजा गया। अनुमोदन प्राप्त होने के बाद डिटेंशन आदेश जारी किए गए।

यह कार्रवाई यानी “Prevention of Illicit Traffic in Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act” के तहत की गई है। इस अधिनियम के अंतर्गत ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध निवारक हिरासत (Preventive Detention) का प्रावधान है, जिनकी गतिविधियां अवैध मादक पदार्थों के व्यापार को बढ़ावा देने वाली पाई जाती हैं और जिनसे समाज में नशे का प्रसार होने की आशंका बनी रहती है। इस कानून के तहत अधिकतम अवधि तक निरोधात्मक हिरासत में रखने का प्रावधान है, जिससे संगठित नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलती है।

जिला पुलिस शिमला के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि निवारक रणनीति का हिस्सा है। पुलिस का दावा है कि पारंपरिक आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के बाद कई आरोपी जमानत पर छूटकर पुनः नशा तस्करी में सक्रिय हो जाते थे। ऐसे में PIT NDPS Act के तहत डिटेंशन आदेश प्रभावी साबित हो रहे हैं, जिससे कथित तस्करों की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जा सके।

सूत्रों के अनुसार, इन 18 आरोपियों को अलग-अलग मामलों में चिह्नित किया गया था। पुलिस ने इनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी और पर्याप्त साक्ष्य संकलित किए। इसके बाद विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए डोजियर तैयार कर संबंधित प्राधिकरण को भेजे गए। आदेश जारी होने के पश्चात सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर निर्धारित अवधि के लिए जेल भेज दिया गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशा तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौती है। विशेष रूप से युवाओं में बढ़ते नशे की प्रवृत्ति को देखते हुए सख्त कदम उठाना आवश्यक हो गया है। जिला पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से संगठित नशा नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने में मदद मिलेगी।

जिला पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके क्षेत्र में किसी भी प्रकार की नशा तस्करी या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। पुलिस का कहना है कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि PIT NDPS Act के तहत की गई यह कार्रवाई उन मामलों में प्रभावी हो सकती है, जहां आरोपी बार-बार आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले में विधिक प्रक्रिया और अधिकारों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

जिला पुलिस शिमला ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भी ऐसे आदतन और संगठित रूप से कार्य कर रहे कथित नशा तस्करों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस का कहना है कि “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के दायरे में रहकर कठोरतम कदम उठाए जाएंगे।

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