चंबा मेडिकल कॉलेज में 21 दिनों में 77 सफल ऑपरेशन, स्टाफ की कमी के बीच डॉ. रोहित बने ‘वन मैन आर्मी’
चंबा। जिला चंबा स्थित मेडिकल कॉलेज में सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के बीच एक डॉक्टर की कार्यनिष्ठा इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। सर्जरी विभाग में तैनात डॉ. रोहित ने कथित तौर पर मिशन मोड में कार्य करते हुए मात्र 21 दिनों के भीतर 77 सफल ऑपरेशन कर एक मिसाल पेश की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस अवधि में उन्होंने करीब 2500 मरीजों का उपचार भी किया, जिससे दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिली।
सूत्रों के अनुसार, सर्जरी विभाग के अन्य चिकित्सक अवकाश पर होने के कारण विभाग की अधिकांश जिम्मेदारी डॉ. रोहित के कंधों पर आ गई थी। ऐसे हालात में उन्होंने न केवल निर्धारित सर्जरी शेड्यूल को जारी रखा, बल्कि आपातकालीन मामलों में भी तत्परता से सर्जिकल हस्तक्षेप किया। बताया जा रहा है कि तीन सप्ताह तक वे 24 घंटे ऑन-कॉल ड्यूटी पर रहे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
अस्पताल सूत्रों का दावा है कि इस दौरान सामान्य सर्जरी से लेकर जटिल मामलों तक का सफल संचालन किया गया। ऑपरेशन थियेटर में लगातार सक्रिय रहने के साथ-साथ डॉ. रोहित ने ओपीडी सेवाएं भी नियमित रूप से संचालित कीं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज जांच और परामर्श के लिए पहुंचते रहे, जिनकी देखभाल और उपचार की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई।
बताया जाता है कि मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान में सर्जरी विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यहां न केवल मरीजों का इलाज होता है, बल्कि मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। जानकारी के अनुसार, डॉ. रोहित ने इस चुनौतीपूर्ण समय में शैक्षणिक गतिविधियों को भी प्रभावित नहीं होने दिया। उन्होंने मेडिकल छात्रों की कक्षाएं नियमित रूप से लीं और क्लिनिकल ट्रेनिंग जारी रखी, ताकि शिक्षण प्रक्रिया बाधित न हो।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी अस्पताल में सीमित संसाधनों के बीच लगातार सर्जरी करना शारीरिक और मानसिक दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में 21 दिनों में 77 सफल ऑपरेशन करना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इन आंकड़ों की विस्तृत पुष्टि होना शेष है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय लोगों के बीच इस कार्य की सराहना की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस अवधि में कई आपातकालीन मामले भी सामने आए, जिनमें समय पर सर्जरी कर मरीजों की जान बचाई गई। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण चंबा जिले के दूरस्थ इलाकों से मरीजों को मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने में समय लगता है। ऐसे में अस्पताल में सर्जरी सेवाओं का सुचारू रूप से उपलब्ध रहना बेहद अहम माना जाता है। बताया जा रहा है कि डॉ. रोहित की निरंतर उपलब्धता से गंभीर मरीजों को अन्य जिलों में रेफर करने की आवश्यकता कम हुई।
अस्पताल प्रबंधन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि स्टाफ की कमी के बावजूद सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए विभागीय स्तर पर समन्वय किया गया। वहीं, मरीजों और उनके परिजनों ने भी डॉक्टर की कार्यशैली और समर्पण की सराहना की है। कई लोगों का कहना है कि लगातार उपलब्धता और त्वरित निर्णय क्षमता ने मरीजों का भरोसा मजबूत किया है।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों पर अक्सर कार्यभार अधिक होता है। विशेषकर सर्जरी जैसे विभागों में जहां आपातकालीन मामलों की संभावना अधिक रहती है, वहां निरंतर सतर्कता आवश्यक होती है। ऐसे में लंबे समय तक 24 घंटे ऑन-कॉल रहना और साथ ही नियमित ओपीडी व शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभाना उल्लेखनीय प्रयास माना जा रहा है।
हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी एक चिकित्सक पर अत्यधिक निर्भरता दीर्घकालिक समाधान नहीं हो सकती। विशेषज्ञों का मत है कि अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं व्यवस्थित और संतुलित रूप से संचालित हो सकें। फिर भी, मौजूदा परिस्थितियों में डॉ. रोहित द्वारा किए गए कार्य को स्थानीय स्तर पर एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
जिला चंबा के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यहां के कई क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाली सर्जिकल सेवाएं मिलना लोगों के लिए बड़ी राहत है। आने वाले समय में यदि विभाग में पर्याप्त संसाधन और स्टाफ उपलब्ध कराया जाता है, तो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और बेहतर हो सकती है।
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