सिरमौर: नाहन मेडिकल कॉलेज में 9 प्रकार की जांच महंगी, नई दरें लागू — जरूरतमंद वर्ग को राहत बरकरार
नाहन (जिला सिरमौर), हिमाचल प्रदेश: सरकारी अस्पतालों में सस्ती जांच की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को अब अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। नाहन स्थित में विभिन्न डायग्नोस्टिक जांचों की नई उपयोगकर्ता शुल्क दरें लागू कर दी गई हैं। हाल ही में रोगी कल्याण समिति की कार्यकारिणी बैठक में लिए गए निर्णय के बाद वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय ने आदेश जारी किए, जिन्हें तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार कुल 9 प्रकार की जांच के लिए नई दरें निर्धारित की गई हैं। इनमें ईसीजी से लेकर वीडियो ईईजी, एनसीवी और अन्य विशेष जांचें शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि आधुनिक मशीनों के रखरखाव, तकनीकी सेवाओं और संचालन व्यय को संतुलित रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
कार्यवाहक एमएस डॉ. रिशम सिंह के अनुसार नई दरें पारदर्शी प्रक्रिया के तहत रोगी कल्याण समिति की स्वीकृति के बाद लागू की गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक रूप से कमजोर और गंभीर मरीजों को पूरी राहत दी जाएगी, ताकि उपचार में किसी प्रकार की बाधा न आए।
नई दरों के तहत ईसीजी जांच के लिए 50 रुपये, यूएसजी (अल्ट्रासाउंड) के लिए 200 रुपये, ईको स्पेशलाइज्ड यूएसजी के लिए 400 रुपये, वीडियो ईईजी के लिए 600 रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा एनसीवी और ईएमजी जांच के लिए 600-600 रुपये, वीईपी के लिए 550 रुपये, बीईआरए के लिए 250 रुपये तथा ट्रेमर एनालिसिस के लिए 500 रुपये शुल्क तय किया गया है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि निजी अस्पतालों की तुलना में ये दरें अभी भी कम हैं और आम मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई है। हालांकि आम लोगों में इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ मरीजों का कहना है कि सीमित आय वाले परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बोझ बढ़ा सकता है, जबकि अन्य का मानना है कि बेहतर मशीनरी और सुविधाओं के लिए मामूली शुल्क स्वीकार्य है।
वहीं राहत की बात यह है कि कई श्रेणियों के मरीजों को इन नई दरों से छूट दी गई है। कैंसर मरीज, एचआईवी संक्रमित मरीज, भर्ती कोविड मरीज, बीपीएल परिवार, आयुष्मान भारत और हिमकेयर योजना के लाभार्थी, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले मरीज, अज्ञात अथवा लावारिस व्यक्ति, दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर लाए गए मरीज तथा एमएलसी श्रेणी के मामलों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी संस्थानों में शुल्क निर्धारण एक संतुलन का विषय होता है, जहां एक ओर संसाधनों के रखरखाव की जरूरत होती है, वहीं दूसरी ओर आम जनता की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नई दरों का मरीजों की संख्या और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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