जब सिस्टम सो गया, तब माडू राम बने सिस्टम
बंगाणा–अरलू सड़क पर नागरिक चेतना की मिसाल
ऊना (हिमाचल प्रदेश)।
जब शिकायतें फाइलों में दबी रह जाएं और जिम्मेदार विभाग खामोश हो जाएं, तब अगर कोई आम नागरिक खुद आगे बढ़कर समस्या का समाधान करे, तो वह केवल काम नहीं करता — बल्कि पूरे सिस्टम को आईना दिखाता है। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है रवाड़ गांव के माडू राम ने।
बंगाणा–अरलू सड़क पर लंबे समय से पड़े जानलेवा गड्ढों से लोग परेशान थे। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन न सड़क सुधरी और न ही प्रशासन ने सुध ली। मजबूर होकर माडू राम ने वह कर दिखाया, जो सिस्टम को करना चाहिए था।
उन्होंने अपने हाथों से गड्ढे भरकर सड़क को चलने लायक बनाया।
यह तस्वीर केवल सड़क मरम्मत की नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही पर करारा तमाचा है। माडू राम ने साबित कर दिया कि बदलाव के लिए पद या कुर्सी नहीं, जज़्बा चाहिए।
स्थानीय लोगों ने माडू राम के इस साहसिक और प्रेरणादायक कदम की सराहना करते हुए कहा कि अगर हर नागरिक इसी तरह जिम्मेदारी निभाए, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। वहीं, यह घटना संबंधित विभागों के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि जनता अब लापरवाही को चुपचाप सहने वाली नहीं।
माडू राम जैसे लोग ही समाज में सुधार की असली नींव रखते हैं।
सैल्यूट है ऐसे जागरूक नागरिकों को।
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