हिमाचल में वर्दी वाले भी बेच रहे चिट्टा: 9 विभागों की लिस्ट जारी, CM ने सस्पेंड करने के दिए निर्देश |
शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक खुलासा सामने आया है। चिट्टे के बढ़ते मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन सबसे गंभीर बात यह है कि अब इस अवैध धंधे में केवल बाहरी तस्कर ही नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारी और वर्दीधारी भी शामिल पाए जा रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी कर्मचारियों को तुरंत सस्पेंड करने के निर्देश दिए हैं।
आम जनता नहीं, सिस्टम के अंदर तक फैला नशे का जाल
प्रदेश में नशे की समस्या अब केवल सामाजिक बुराई नहीं रह गई है, बल्कि यह सिस्टम के भीतर गहरी पैठ बना चुकी है। पुलिस जांच और आंकड़ों से साफ हो गया है कि शिक्षा, बिजली, पानी, परिवहन, पुलिस और यहां तक कि सेना जैसे जिम्मेदार विभागों के कुछ कर्मचारी भी चिट्टे और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी में लिप्त हैं। जिन पर समाज और कानून की रक्षा की जिम्मेदारी थी, वही लोग अब हिमाचल को नशे के दलदल में धकेलने का काम कर रहे हैं।
9 विभागों की चौंकाने वाली सूची तैयार
पुलिस द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में 9 ऐसे सरकारी विभागों की सूची सामने आई है, जिनके कर्मचारी नशा तस्करी या नशीले पदार्थों के साथ पकड़े गए हैं। यह खुलासा सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इनमें कई संवेदनशील विभाग भी शामिल हैं।
इस सूची में पुलिस विभाग के अलावा शिक्षा, जलशक्ति, विद्युत बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, बागवानी, राजस्व, एचआरटीसी और भारतीय सेना के नाम शामिल हैं। यह तथ्य अपने आप में पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करता है।
15 पुलिस कर्मी खुद बने सौदागर
सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि इस सूची में 15 पुलिस कर्मचारी भी शामिल हैं। जिनका काम नशा तस्करों को पकड़कर जेल भेजना था, वही खुद चिट्टे की तस्करी करते हुए पकड़े गए। अब इन सभी पुलिस कर्मियों पर सस्पेंशन की तलवार लटक रही है और उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
60 सरकारी कर्मचारी अब तक गिरफ्तार
प्रदेश भर में अब तक 60 सरकारी कर्मचारी नशे के मामलों में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मंडी जिला इस मामले में सबसे ज्यादा सुर्खियों में है, जहां अकेले 15 सरकारी कर्मचारी नशीले पदार्थों की खेप के साथ पकड़े गए। जिला एसपी मंडी साक्षी वर्मा ने पुष्टि की है कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट सरकार और उच्च पुलिस अधिकारियों को भेज दी गई है।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश – कोई नहीं बचेगा
मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि नशे के खिलाफ सरकार की नीति ज़ीरो टॉलरेंस की है। चाहे आरोपी किसी भी विभाग में हो, वर्दी में हो या ऊंचे पद पर—दोषी पाए जाने पर उसे बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का मानना है कि यदि सिस्टम के अंदर बैठे लोग ही नशे का कारोबार करेंगे, तो समाज को इससे बचाना असंभव हो जाएगा।
जनता में गुस्सा, कार्रवाई की मांग तेज
इस खुलासे के बाद आम जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोग मांग कर रहे हैं कि केवल सस्पेंशन ही नहीं, बल्कि ऐसे कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी सरकारी पद का गलत इस्तेमाल करने की हिम्मत न कर सके।
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