NDPS केस में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश ,गिरफ्तारी के वक्त कहां थी पुलिस ?
हाईकोर्ट ने टावर लोकेशन मंगाने के दिए आदेश
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए जांच में शामिल पुलिस कर्मियों की मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड पेश करने के आदेश दिए ।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए जरूरी साक्ष्य हासिल करने का अवसर मिलना चाहिए।
यह मामला चंबा जिला पुलिस से जुड़ा है ,जहां पुलिस ने आकाश महाजन के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत मामला दर्ज कर चार्जशीट अदालत में पेश की थी ।आरोपी के अनुसार पुलिस ने 8 सितंबर2024 को जिस स्थान और समय पर उसकी गिरफ्तारी तथा नशीले पदार्थ की बरामदगी दिखाई, उस पर उसे संदेह है। इसी को स्पष्ट करने के लिए आरोपी ने अदालत से घटना के समय पुलिस टीम में शामिल कर्मियों के मोबाइल नंबरों की टावर लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड मंगवाने की मांग की थी ।
गिरफ्तारी के समय कहां मौजूद थी पुलिस टीम ?
आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसे पुलिस कर्मियों की निजी बातचीत या उनकी कन्वर्सेशन डिटेल हासिल करने में कोई रुचि नहीं है। उसकी मांग केवल इतनी है कि घटना के समय पुलिस कर्मियों के मोबाइल फोन किस स्थान पर सक्रिय थे, इसकी जानकारी सामने आए। टावर लोकेशन से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि पुलिस टीम वास्तव में उसी स्थान पर मौजूद थी या नहीं, जहां पुलिस ने गिरफ्तारी और बरामदगी की बात कही है।
आरोपी का कहना था कि यदि पुलिस की ओर से बताई गई घटना की जगह और समय सही है, तो संबंधित पुलिस कर्मियों की मोबाइल टावर लोकेशन भी उसी घटनास्थल के आसपास होनी चाहिए। ऐसे में यह जानकारी मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है।
निचली अदालत ने खारिज कर दी थी अर्जी
इससे पहले चंबा की विशेष अदालत ने पुलिस कर्मियों की निजता का हवाला देते हुए आरोपी की टावर लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड से संबंधित अर्जी को खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट का रुख किया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की अदालत में हुई। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपी की अर्जी स्वीकार कर ली और संबंधित पुलिस कर्मियों की लोकेशन से जुड़ी जानकारी अदालत के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए ।
पुलिस की निजता से ऊपर निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए आवश्यक साक्ष्य जुटाने का पूरा कानूनी अधिकार है। अदालत ने यह भी माना कि एनडीपीएस जैसे कठोर कानूनों में आरोपी के खिलाफ वैधानिक धारणा काम करती है , इसलिए उसे अपने बचाव में जरूरी साक्ष्य पेश करने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
अदालत के अनुसार, इस मामले में मांगी गई जानकारी पुलिस कर्मियों की निजी बातचीत जानने के लिए नहीं बल्कि घटना के समय उनकी वास्तविक लोकेशन की पुष्टि के लिए है। इसलिए यह जानकारी मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है
24 घंटे की लोकेशन मांगी गई
हाईकोर्ट ने संबंधित मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी को निर्देश दिया है कि 8 सितंबर 2024 सुबह 6 बजे से 9 सितंबर 2024 सुबह 6 बजे तक की 24 घंटे की केवल लोकेशन संबंधी जानकारी अदालत के समक्ष पेश की जाए। इसके साथ संबंधित उपभोक्ता आवेदन फॉर्म भी प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।
अदालत के आदेश के दायरे में सब-इंस्पेक्टर गुरबख्श, कांस्टेबल केवल सिंह, कांस्टेबल जितेंद्र सिंह, होमगार्ड अजय कुमार, कांस्टेबल संदीप कुमार, हेड कांस्टेबल दलीप सिंह, होमगार्ड राजेंद्र सिंह और होमगार्ड तरबीज सिंह के मोबाइल विवरण शामिल हैं।
अब लोकेशन से साफ होगी पुलिस की कहानी?
इस आदेश के बाद मामले में पुलिस की ओर से बताई गई गिरफ्तारी और बरामदगी की परिस्थितियों की जांच में मोबाइल टावर लोकेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि लोकेशन पुलिस के बताए घटनाक्रम से मेल खाती है तो अभियोजन की कहानी को समर्थन मिल सकता है, जबकि लोकेशन में अंतर पाए जाने पर बचाव पक्ष को अपनी दलील मजबूत करने में मदद मिल सकती है ।
हाईकोर्ट के इस फैसले को निष्पक्ष सुनवाई ,आरोपी के बचाव के अधिकार और जांच में पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है
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