हिमाचल में नशे का बढ़ता जाल: 6 महीने में 1132 NDPS केस, 1906 गिरफ्तारियां; 176.681 किलो चरस और 10.708 किलो चिट्टा बरामद
शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद सामने आए साल 2026 के शुरुआती छह महीनों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। जनवरी से 30 जून 2026 तक प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल 1132 मामले दर्ज किए गए और 1906 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 1831 पुरुष और 75 महिलाएं शामिल हैं। पुलिस की कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में चरस, चिट्टा, अफीम, भुक्की, गांजा, स्मैक, एलएसडी और प्रतिबंधित नशीली दवाइयां बरामद की गई हैं।
छह महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो हिमाचल में नशे के कारोबार का दायरा केवल किसी एक तरह के मादक पदार्थ तक सीमित नहीं है। पुलिस ने इस अवधि में 176.681 किलो चरस और 10 किलो 708 ग्राम चिट्टा बरामद किया है। इसके अलावा 23 किलो से अधिक अफीम, 396 किलो से अधिक भुक्की, 40.48 किलो गांजा और 1132 ग्राम स्मैक भी पुलिस की कार्रवाई में पकड़ी गई है। वहीं, 11.75 ग्राम एलएसडी की बरामदगी भी सामने आई है।
छह महीने में 1132 NDPS मामले, 1906 गिरफ्तार
जनवरी 2026 से 30 जून 2026 तक प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुलिस ने नशे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एनडीपीएस एक्ट के तहत 1132 मामले दर्ज किए। इन मामलों में कुल 1906 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। गिरफ्तार लोगों में 1831 पुरुष और 75 महिलाएं शामिल हैं।
आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि नशे से जुड़े मामलों में महिलाएं भी आरोपी के रूप में सामने आई हैं। हालांकि गिरफ्तार आरोपियों में पुरुषों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन 75 महिलाओं की गिरफ्तारी भी इस बात को दर्शाती है कि नशे से जुड़े मामलों में महिलाओं की संलिप्तता को भी पुलिस गंभीरता से देख रही है।
चरस के साथ चिट्टे की बढ़ती चुनौती
हिमाचल में लंबे समय से चरस की बरामदगी नशे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का एक प्रमुख हिस्सा रही है। इस साल के शुरुआती छह महीनों में पुलिस ने 176.681 किलो चरस बरामद की है। इतनी बड़ी मात्रा में चरस की बरामदगी प्रदेश में नशीले पदार्थों की मौजूदगी और इसकी सप्लाई को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखती है।
इसके साथ ही 10 किलो 708 ग्राम चिट्टा बरामद होना भी चिंता का बड़ा कारण है। चिट्टे की तस्करी के मामले प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार सामने आते रहे हैं और छह महीने के आंकड़े बताते हैं कि यह नशीला पदार्थ भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
चरस और चिट्टे के अलावा पुलिस ने इस अवधि में 1132 ग्राम स्मैक भी बरामद की है। इससे साफ है कि प्रदेश में नशीले पदार्थों की मौजूदगी केवल एक या दो पदार्थों तक सीमित नहीं है।
अफीम और भुक्की की भी बड़ी बरामदगी
पुलिस की कार्रवाई में अफीम और भुक्की की बड़ी मात्रा भी बरामद हुई है। जनवरी से जून तक प्रदेश में 23 किलो से अधिक अफीम और 396 किलो से अधिक भुक्की पकड़ी गई है।
इससे भी अधिक महत्वपूर्ण आंकड़ा अफीम के पौधों की बरामदगी का है। पुलिस ने छह महीनों के दौरान 11,85,897 अफीम के पौधे बरामद किए हैं। यह आंकड़ा नशे की समस्या के उस पहलू को सामने लाता है, जिसमें अवैध रूप से की जा रही अफीम की खेती भी शामिल है।
नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल तैयार मादक पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस द्वारा अवैध रूप से उगाई जा रही अफीम की फसल के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
गांजा और एलएसडी की मौजूदगी भी सामने आई
छह महीने की पुलिस कार्रवाई में 40.48 किलो गांजा और 11.75 ग्राम एलएसडी भी बरामद की गई है। इन बरामदगियों से यह संकेत मिलता है कि प्रदेश में नशे का स्वरूप कई प्रकार के मादक पदार्थों तक फैला हुआ है।
जहां चरस और चिट्टा जैसे पदार्थों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, वहीं गांजा, स्मैक और एलएसडी की बरामदगी भी पुलिस के लिए अलग चुनौती पेश करती है। ऐसे में नशे के खिलाफ कार्रवाई में केवल किसी एक पदार्थ पर फोकस करने के बजाय अलग-अलग प्रकार के मादक पदार्थों की सप्लाई पर नजर रखना जरूरी हो जाता है।
प्रतिबंधित दवाइयां भी नशे के नेटवर्क का हिस्सा
नशे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई में एक और चिंताजनक पहलू प्रतिबंधित नशीली दवाइयों की बरामदगी है। छह महीनों में पुलिस ने 2,61,339 प्रतिबंधित नशीली गोलियां और 26,748 प्रतिबंधित कैप्सूल बरामद किए हैं।
इतनी बड़ी संख्या में प्रतिबंधित दवाइयों की बरामदगी यह दिखाती है कि नशे की समस्या केवल चरस, चिट्टा, अफीम या भुक्की जैसे पारंपरिक मादक पदार्थों तक सीमित नहीं है। प्रतिबंधित दवाइयों की सप्लाई भी नशे से जुड़े मामलों में सामने आ रही है।
मंडी में सबसे ज्यादा NDPS मामले
जिला स्तर पर दर्ज मामलों की बात करें तो मंडी जिला 177 NDPS मामलों के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद शिमला में 169 मामले दर्ज किए गए। बिलासपुर में 118, कुल्लू में 99 और सिरमौर में 90 मामले सामने आए।
अन्य जिलों की बात करें तो सोलन में 79, नूरपुर पुलिस जिला में 67, कांगड़ा में 63, हमीरपुर में 55, बद्दी पुलिस जिला में 54, चंबा में 49, ऊना में 48 और देहरा पुलिस जिला में 38 NDPS मामले दर्ज किए गए।
वहीं किन्नौर में 24 और लाहौल-स्पीति में एक मामला दर्ज हुआ। स्टेट सीआईडी के थाने में भी एक NDPS मामला दर्ज किया गया।
आंकड़े दे रहे गंभीर संकेत
छह महीने के ये आंकड़े हिमाचल में नशे की समस्या की गंभीरता को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। एक ओर पुलिस लगातार कार्रवाई करते हुए मामले दर्ज कर रही है और गिरफ्तारियां कर रही है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग तरह के नशीले पदार्थों की बरामदगी यह बताती है कि चुनौती व्यापक है।
1132 मामलों में 1906 गिरफ्तारियां, 176.681 किलो चरस, 10.708 किलो चिट्टा, 23 किलो से अधिक अफीम, 396 किलो से अधिक भुक्की, 40.48 किलो गांजा, 1132 ग्राम स्मैक और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाइयों की बरामदगी इस पूरे परिदृश्य की गंभीरता को सामने रखती है।
इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं हो सकती। नशे की सप्लाई से जुड़े मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ इसकी पूरी सप्लाई चेन पर प्रभावी कार्रवाई और समाज में जागरूकता भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल छह महीने के आंकड़े हिमाचल के लिए एक गंभीर चेतावनी की तरह हैं। नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन सामने आ रहे मामलों और बरामदगी की मात्रा यह सवाल भी खड़ा करती है कि प्रदेश में नशे की सप्लाई को जड़ से खत्म करने के लिए आने वाले समय में कार्रवाई किस स्तर तक और कितनी प्रभावी होती है।
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