40 ग्राम चिट्टा केस में बड़ा नेटवर्क बेनकाब: पांवटा साहिब से 24 वर्षीय सह-अभियुक्त गिरफ्तार, बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल डाटा से खुला तस्करी का पूरा लिंक
जिला शिमला के पुलिस थाना सदर में दर्ज FIR नंबर 30/2026 के तहत चिट्टा तस्करी मामले में जांच अब बड़े नेटवर्क तक पहुंचती नजर आ रही है। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस ने 06 अप्रैल 2026 को एक महिला आरोपी को 40 ग्राम चिट्टा/हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। इस बरामदगी के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी और वित्तीय जांच को आगे बढ़ाया, जिसमें अब कई अहम खुलासे सामने आए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन का गहन तकनीकी विश्लेषण किया गया। इसमें कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सएप चैट, डिजिटल ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और बैंकिंग गतिविधियों की जांच शामिल रही। कथित तौर पर जांच में यह सामने आया कि मादक पदार्थ की खरीद के लिए बैंक खातों के माध्यम से पैसों का आदान-प्रदान किया जा रहा था। इससे यह संकेत मिले कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के तहत संचालित हो रहा था।
पुलिस ने जांच के दौरान बैकवर्ड लिंक स्थापित करते हुए मामले में एक और अहम कड़ी को जोड़ा। सह-अभियुक्त नीरज (24 वर्ष), निवासी देव नगर, कृपालशीला गुरुद्वारा के पास, पांवटा साहिब, जिला सिरमौर को 13 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि नीरज कथित तौर पर मादक पदार्थ की खरीद के लिए धनराशि ट्रांसफर करने, सप्लायर और अन्य नेटवर्क सदस्यों के साथ तालमेल बनाने और पूरे सिस्टम को संचालित करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। इसी आधार पर उसकी संलिप्तता NDPS एक्ट की धारा 29 के तहत पाई गई है, जो आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधान है।
पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि नीरज के खिलाफ पहले भी NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज है, जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में शामिल कर लिया गया है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह पहले से ही इस अवैध कारोबार से जुड़ा हो सकता है।
गिरफ्तार सह-अभियुक्त को माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 16 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों, सप्लाई चेन और फाइनेंशियल ट्रेल की गहराई से जांच की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद इस तरह के मामलों में संगठित नेटवर्क का सामने आना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। छोटी-छोटी बरामदगियों के पीछे बड़े सप्लायर और फाइनेंशियल नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका लगातार जताई जाती रही है। ऐसे में यह मामला न केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित है, बल्कि पूरे नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनता दिख रहा है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क की जड़ें किन-किन क्षेत्रों तक फैली हुई हैं।
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