शिमला से आदेश जारी: हिमाचल के सरकारी स्कूलों में फेस बायोमेट्रिक से होगी शिक्षकों की हाजिरी

 

शिमला में शिक्षा विभाग की डिजिटल पहल, हिमाचल के सरकारी स्कूलों में फेस बायोमेट्रिक से होगी शिक्षकों की हाजिरी

शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों और शिक्षा कार्यालयों में फेस बेस्ड बायोमेट्रिक मशीनें लगाने का निर्णय लिया है। इस नई प्रणाली के माध्यम से कर्मचारियों की हाजिरी रियल टाइम में दर्ज होगी और राज्य स्तर पर उसकी निगरानी संभव हो सकेगी।

स्कूल शिक्षा निदेशालय की ओर से इस संबंध में सभी जिला उपनिदेशकों को औपचारिक पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दे दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में समय की पाबंदी सुनिश्चित करना, कार्य संस्कृति को मजबूत करना और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी अपनी उपस्थिति फेस पहचान या निर्धारित पिन के माध्यम से दर्ज करेंगे।

राज्य स्तर पर होगी निगरानी









नई डिजिटल प्रणाली के तहत प्रत्येक स्कूल और कार्यालय में स्थापित मशीनें सीधे केंद्रीय सर्वर से जुड़ी रहेंगी। इससे उपस्थिति का रिकॉर्ड रियल टाइम में उपलब्ध रहेगा और उच्च स्तर के अधिकारी भी इसकी निगरानी कर सकेंगे। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इससे अनुपस्थित रहने या देरी से आने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

शिक्षा विभाग का मानना है कि डिजिटल उपस्थिति प्रणाली से प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी और स्कूलों में नियमितता आएगी। इससे शिक्षण कार्य की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

आधुनिक तकनीक से लैस मशीनें

इन फेस बेस्ड बायोमेट्रिक मशीनों की खरीद राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम के माध्यम से की गई है। विभाग के अनुसार, मशीनें आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली हैं। इनमें 3.5 इंच की एलसीडी टच स्क्रीन दी गई है, जिस पर गोरिल्ला ग्लास लगा हुआ है।

मशीन में 2 मेगापिक्सल का नेटवर्क कैमरा और 2 मेगापिक्सल का आईआर कैमरा भी उपलब्ध है, जिससे लाइव फेस डिटेक्शन संभव हो सकेगा। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, आईआर कैमरा कम रोशनी की स्थिति में भी सटीक पहचान सुनिश्चित करेगा।

मशीन की स्टोरेज क्षमता भी पर्याप्त है। इसमें एक हजार से अधिक उपयोगकर्ताओं का पंजीकरण किया जा सकता है। साथ ही इसमें लगभग एक लाख पचास हजार फेस टेम्पलेट और चार लाख तक इवेंट्स स्टोर करने की सुविधा उपलब्ध है। इससे लंबे समय तक डाटा सुरक्षित रखा जा सकेगा।

बैटरी बैकअप और वारंटी

मशीनों में न्यूनतम चार घंटे का बैटरी बैकअप दिया गया है, ताकि बिजली कटौती की स्थिति में भी हाजिरी दर्ज करने की प्रक्रिया बाधित न हो। इसके अतिरिक्त तीन वर्ष की वारंटी भी प्रदान की गई है, जिससे रखरखाव और तकनीकी सहायता सुनिश्चित की जा सके।

सुरक्षित स्थापना और प्रशिक्षण के निर्देश

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन मशीनों को स्कूलों और कार्यालयों में सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया जाए, ताकि किसी प्रकार की क्षति या छेड़छाड़ की संभावना न रहे। संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि सभी कर्मचारियों को मशीन के संचालन का उचित प्रशिक्षण दिया जाए।

प्रत्येक शिक्षक और कर्मचारी का पंजीकरण मशीन में अनिवार्य रूप से किया जाएगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी को नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी और अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

पारदर्शिता और अनुशासन पर जोर

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह पहल शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से उपस्थिति दर्ज होने से रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की हेरफेर की संभावना समाप्त हो जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह शिक्षा क्षेत्र में प्रशासनिक सुधार का बड़ा उदाहरण बन सकती है। आने वाले समय में इस डिजिटल मॉडल को अन्य विभागों में भी लागू करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

फिलहाल विभाग ने सभी जिलों को निर्देशित किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर मशीनों की स्थापना और पंजीकरण प्रक्रिया पूरी की जाए। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में यह डिजिटल परिवर्तन शिक्षा तंत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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