हिमाचल प्रदेश में ‘पशु-मित्र’ भर्ती: बोरी उठाने की 1 शर्त खत्म, प्रदेशभर के युवाओं को राहत

हिमाचल प्रदेश में ‘पशु-मित्र’ भर्ती: बोरी उठाने की 1 शर्त खत्म, प्रदेशभर के हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत

शिमला: हिमाचल प्रदेश में चल रही ‘पशु-मित्र’ भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा एक अहम फैसला सामने आया है। सरकार ने भर्ती में शामिल बोरी उठाने की अनिवार्य शर्त को समाप्त कर दिया है। इस निर्णय के बाद प्रदेशभर के हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से इस शर्त पर आपत्ति जता रहे थे।

जानकारी के अनुसार, पशु-मित्र भर्ती में शारीरिक दक्षता परीक्षण के तहत अभ्यर्थियों को बोरी उठाने की शर्त पूरी करनी होती थी। कई युवाओं का कहना था कि यह शर्त पद की वास्तविक कार्यप्रणाली से सीधे तौर पर संबंधित नहीं है। उनका तर्क था कि पशु-मित्र का कार्य मुख्य रूप से पशुपालन विभाग से जुड़े सहयोगी कार्य, टीकाकरण अभियान में सहायता, ग्रामीण स्तर पर पशुओं की देखभाल और विभागीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाने से संबंधित होता है, ऐसे में बोरी उठाने की अनिवार्यता को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।










सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अभ्यर्थियों द्वारा उठाई गई आपत्तियों और विभिन्न स्तरों पर हुए विचार-विमर्श के बाद इस शर्त को हटाने का निर्णय लिया गया। बताया जा रहा है कि सरकार और संबंधित विभाग का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक तार्किक, पारदर्शी और कार्य-उन्मुख बनाना है, ताकि चयन प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं न रहें।

प्रदेश के कई जिलों से अभ्यर्थियों ने इस शर्त को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले अनेक योग्य उम्मीदवार केवल शारीरिक परीक्षण की इस शर्त के कारण स्वयं को असहज महसूस कर रहे थे। खासकर महिला अभ्यर्थियों और कुछ कमजोर वर्गों के उम्मीदवारों ने भी इसे लेकर अपनी बात रखी थी। अब इस शर्त के समाप्त होने से अधिक संख्या में अभ्यर्थियों के आवेदन करने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि भर्ती प्रक्रिया की अन्य पात्रता शर्तें और चयन मानदंड यथावत रहेंगे। अभ्यर्थियों को शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की शर्तों को पहले की तरह पूरा करना होगा। यह भी संकेत मिले हैं कि संशोधित दिशा-निर्देश जल्द ही आधिकारिक रूप से जारी किए जा सकते हैं, ताकि सभी जिलों में एक समान प्रक्रिया लागू की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में वही शारीरिक या तकनीकी मानदंड शामिल होने चाहिए जो संबंधित पद की वास्तविक जिम्मेदारियों से सीधे जुड़े हों। ऐसे में ‘पशु-मित्र’ पद के संदर्भ में बोरी उठाने की शर्त को हटाना एक व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। इससे चयन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और प्रासंगिक बन सकती है।

वहीं, कुछ अभ्यर्थियों ने इसे युवाओं की आवाज सुने जाने का सकारात्मक उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की व्यावहारिक समस्या सामने आती है, तो समय रहते सुधार होना आवश्यक है। इससे सरकार और युवाओं के बीच विश्वास भी मजबूत होता है।

फिलहाल प्रदेशभर में ‘पशु-मित्र’ भर्ती को लेकर चर्चा का माहौल है। अभ्यर्थी संशोधित नियमों की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बदलाव के बाद भर्ती प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ेगी और अधिक योग्य उम्मीदवार सामने आएंगे।

सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि भर्ती प्रक्रियाओं को समय-समय पर समीक्षा के आधार पर संशोधित किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित की जा सके। आने वाले दिनों में इस भर्ती से संबंधित अन्य अपडेट भी सामने आ सकते हैं।

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