हिमाचल के मंदिरों के धन पर फिर सियासी संग्राम, हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका लाएगी सुक्खू सरकार
शिमला।
हिमाचल प्रदेश के मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और उसके उपयोग को लेकर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने साफ कर दिया है कि मंदिरों की आय को केवल धार्मिक परिसरों तक सीमित रखने के पक्ष में वह नहीं है। सरकार का मानना है कि यह धन समाज के कमजोर वर्गों के कल्याण, जनहितकारी योजनाओं और प्रदेश के समग्र विकास में भी उपयोग किया जाना चाहिए। इसी सोच के तहत राज्य सरकार अब मंदिर निधि के सरकारी उपयोग पर हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में लगाई गई रोक को हटवाने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी में है।
सिर्फ मंदिरों तक सीमित न रहे दान का उपयोग
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हिमाचल के मंदिरों से प्राप्त धन केवल मंदिरों के सौंदर्यीकरण या श्रद्धालुओं की सुविधाओं तक ही सीमित नहीं है। इस राशि का उपयोग गरीब और जरूरतमंद लोगों के इलाज, मेधावी विद्यार्थियों की शिक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास, गौशालाओं के संचालन और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग जैसे कार्यों में भी किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देश के कई बड़े और प्रतिष्ठित मंदिर पहले से ही स्कूल, कॉलेज, धर्मशालाएं और अस्पताल चला रहे हैं। ऐसे में यदि हिमाचल प्रदेश में मंदिरों की आय का उपयोग सामाजिक कल्याण के लिए किया जा रहा है, तो उस पर सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं है।
हाईकोर्ट में दाखिल होगी पुनर्विचार याचिका
डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने ऊना जिले के चिंतपूर्णी क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अक्टूबर माह में अदालत द्वारा मंदिर निधि के सरकारी उपयोग पर लगाई गई रोक के बाद कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हुई हैं। सरकार का मानना है कि संभव है कि उस समय न्यायालय के समक्ष सरकार का पक्ष पूरी मजबूती के साथ प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
इसी कारण अब राज्य सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर अपना पक्ष विस्तार से रखने जा रही है, ताकि अदालत के समक्ष यह स्पष्ट किया जा सके कि मंदिरों की पवित्रता और धार्मिक स्वरूप से कोई समझौता किए बिना भी इस धन का उपयोग समाज के हित में किया जा सकता है।
चिंतपूर्णी मंदिर विकास को नहीं लगेगा ब्रेक
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चिंतपूर्णी मंदिर सहित प्रदेश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों की आय से आसपास के क्षेत्रों को विकास की नई दिशा मिली है। चिंतपूर्णी मंदिर क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 150 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में रुकने नहीं दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार व विकास का लाभ मिले।
विपक्ष के विरोध से पहले भी गरमाया था मुद्दा
मंदिरों के धन के उपयोग को लेकर विपक्ष पहले भी सुक्खू सरकार पर तीखा हमला करता रहा है। विधानसभा से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर हंगामा हो चुका है। विपक्ष ने सरकार पर धार्मिक आस्था से खिलवाड़ करने के आरोप लगाए थे। अब पुनर्विचार याचिका की तैयारी के साथ यह विषय एक बार फिर राजनीतिक टकराव का कारण बन सकता है।
चिंतपूर्णी मेले पर भी विपक्ष को जवाब
चिंतपूर्णी मेले को लेकर उठे सवालों पर भी डिप्टी सीएम ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब कुल्लू दशहरा, मंडी शिवरात्रि और चंबा का मिंजर मेला राज्य स्तरीय पहचान बना सकते हैं, तो माता चिंतपूर्णी के मेले पर आपत्ति क्यों। पिछले दो वर्षों में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ इस मेले की लोकप्रियता और धार्मिक महत्व को स्वयं साबित करती है।
उन्होंने प्रशासन को आने वाले वर्षों में चिंतपूर्णी महोत्सव को और अधिक भव्य बनाने, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के विस्तार के निर्देश भी दिए। सरकार का साफ संदेश है—मंदिरों की पवित्रता बनी रहेगी और उनका योगदान समाज व प्रदेश के व्यापक हित में भी जारी रहेगा।
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