महाराष्ट्र के चंद्रपुर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक पति ने अपनी ही पत्नी को जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार दिया। यह मामला न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि समाज में बढ़ती घरेलू हिंसा के काले चेहरे को भी उजागर करता है।
घटना का पूरा विवरण
महाराष्ट्र के चंद्रपुर शहर के महाकाली वार्ड के अंतर्गत आने वाले गौतम नगर इलाके में 5 जनवरी 2026 की रात को यह खौफनाक वारदात हुई। 27 वर्षीय दीक्षा शुभम भड़के, जो पिछले कुछ महीनों से अपने पति से अलग रह रही थी, को उसके पति ने कथित तौर पर आग के हवाले कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, दीक्षा और उसके पति शुभम के बीच पिछले काफी समय से अनबन चल रही थी। विवाद इस हद तक बढ़ चुका था कि दीक्षा पिछले छह-सात महीनों से अपने पति का घर छोड़कर अपनी दादी के पास रहने चली गई थी। 5 जनवरी की रात करीब 9 बजे, जब दीक्षा की दादी घर पर मौजूद नहीं थी, शुभम वहां पहुंचा। उसने दीक्षा के साथ झगड़ा शुरू किया और गुस्से में आकर उसके कपड़ों पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी।
हैवानियत की सारी हदें पार
आरोपी पति की क्रूरता यहीं खत्म नहीं हुई। दीक्षा को आग लगाने के बाद, उसने कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और उसे तड़पता छोड़कर मौके से फरार हो गया। दीक्षा घर के अंदर आग की लपटों में घिरी रही और बचाने के लिए चिल्लाती रही, लेकिन दरवाजा बंद होने के कारण वह बाहर नहीं निकल सकी।
जब उसकी दादी घर वापस लौटीं, तो उन्होंने बाहर से ताला लगा पाया और अंदर से दीक्षा की चीखें सुनीं। उन्होंने तुरंत पड़ोसियों की मदद से दरवाजा खोला, तो देखा कि दीक्षा गंभीर रूप से झुलसी हुई हालत में तड़प रही थी। उसे तुरंत चंद्रपुर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे आईसीयू (ICU) में भर्ती किया गया।
मौत से पहले का बयान (Dying Declaration)
अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए दीक्षा ने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपने परिजनों को पूरी आपबीती सुनाई। उसने स्पष्ट रूप से बताया कि उसके पति शुभम ने ही उसे जिंदा जलाने की कोशिश की और दरवाजा बंद कर भाग गया। परिजनों ने दीक्षा के इस बयान का वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया, जो अब इस मामले में सबसे बड़ा सबूत बन गया है।
लगातार दो दिनों तक मौत से लड़ने के बाद, 7 जनवरी की सुबह दीक्षा ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। उसकी मौत के बाद पूरे इलाके में मातम और गुस्से का माहौल है।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी पक्ष
चंद्रपुर सिटी पुलिस ने मृतका की दादी की शिकायत के आधार पर एफआईआर (FIR) दर्ज की है। पुलिस निरीक्षक निशिकांत रामटेके ने बताया कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी पति शुभम भड़के को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, दीक्षा और शुभम की शादी करीब पांच साल पहले हुई थी और उनकी चार साल की एक बेटी भी है। बेटी वर्तमान में अपने पिता के पास ही रह रही थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस हत्या के पीछे कोई और गहरी साजिश थी या यह सिर्फ तात्कालिक गुस्से का परिणाम था।
घरेलू हिंसा का बढ़ता ग्राफ
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को खड़ा करती है कि आखिर वैवाहिक रिश्ते इतने हिंसक क्यों होते जा रहे हैं? दीक्षा ने सुरक्षा की दृष्टि से अपना घर छोड़ दिया था, फिर भी वह सुरक्षित नहीं रह सकी। आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से उस समय का चुनाव किया जब वह घर में अकेली थी।
परिजनों ने मांग की है कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और मामले की गहन जांच जारी है।
निष्कर्ष
चंद्रपुर की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। एक मासूम महिला की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि उसका जीवनसाथी उसकी सुरक्षा करने के बजाय उसकी जान का दुश्मन बन गया। दीक्षा की कांपती आवाज में रिकॉर्ड किया गया वह आखिरी बयान न केवल उसके इंसाफ की गुहार है, बल्कि उन हजारों महिलाओं की आवाज है जो आज भी बंद कमरों में घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं।
महत्वपूर्ण नोट: यह लेख सार्वजनिक जानकारी और उपलब्ध समाचार तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सूचना प्रदान करना है। किसी भी कानूनी कार्यवाही के लिए पुलिस की आधिकारिक चार्जशीट और न्यायालय के फैसले को ही अंतिम माना जाना चाहिए।
