चलेट गांव में चीखों के बीच उठीं चार अर्थियां: धुंध ने ली ऊना के चार युवाओं की जान, उजड़ गए हंसते-खेलते परिवार** **ऊना/दौतुलपुर चौक (हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में आज का सूरज खुशियां नहीं, बल्कि मातम का अंधेरा लेकर आया। पंजाब के होशियारपुर-दसूहा मुख्य मार्ग पर बीते कल हुए एक भीषण **Road Accident** ने ऊना के चलेट गांव के चार परिवारों की नींव हिलाकर रख दी। आज जब एक साथ चार चिताएं जलीं, तो केवल चलेट गांव ही नहीं, बल्कि समूचा जिला ऊना गमगीन हो उठा। यह केवल एक सड़क हादसा नहीं था, बल्कि नियति का वह क्रूर प्रहार था जिसने कई मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया।



### **दुबई की फ्लाइट और अनहोनी का सफर**


यह दुखद कहानी शुरू होती है एक सुनहरे भविष्य के सपने के साथ। चलेट गांव का निवासी अमृत डडवाल दुबई जाने वाला था। गांव में खुशी का माहौल था कि उनका एक साथी **Overseas** जाकर परिवार का नाम रोशन करेगा। उसे अमृतसर **Airport** पर फ्लाइट पकड़ाने के लिए गांव के ही चार गहरे दोस्त—सुखविंदर, सुशील, बृज कुमार और अरुण कुमार—अपनी कार (HP 72B-6869) में सवार होकर खुशी-खुशी निकले थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी **Journey** साबित होगा।


### **हादसे का खौफनाक मंजर: 200 मीटर तक घसीटती गई कार**


प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, यह घटना सुबह लगभग 5:30 बजे की है, जब पूरा इलाका घनी धुंध (Dense Fog) की चादर में लिपटा हुआ था। जब उनकी कार होशियारपुर के पास एक लिंक रोड से मेन रोड पर मुड़ने की कोशिश कर रही थी, तभी दसूहा की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार पनबस (Punjab Roadways) ने काल बनकर उन्हें टक्कर मार दी।


हादसा इतना भयावह था कि बस ने कार को **Impact** के बाद लगभग 200 मीटर तक सड़क पर घसीटा। कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चार लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। अनियंत्रित बस इसके बाद सड़क किनारे बनी झुग्गियों पर जा चढ़ी। यह महज एक इत्तेफाक था कि उस वक्त झुग्गियों के भीतर कोई मौजूद नहीं था, वरना यह **Disaster** और भी बड़ा रूप ले सकता था।


### **चार घर, चार कहानियां और अंतहीन दर्द**


इस हादसे ने जिन चार लोगों को छीना, वे अपने-अपने परिवारों के स्तंभ थे। उनके पीछे छूटे परिवारों की स्थिति देखकर पत्थर दिल इंसान की आंखें भी नम हो जाएं:


1. **सुखविंदर सिंह (45):** सुखविंदर सिंह भारतीय सेना से **Retired** होकर लौटे थे। देश की सेवा करने के बाद वे अपने परिवार के साथ शांति से जीवन बिता रहे थे। उनकी मृत्यु से उनकी 15 साल की बेटी और 12 साल का बेटा अनाथ हो गए हैं।

2. **बृज कुमार (38):** बृज एक प्राइवेट स्कूल की बस में हेल्पर के तौर पर काम करते थे। वे एक मेहनती इंसान थे। उनके पीछे उनकी पत्नी, एक 8 साल का बेटा और महज 2 साल की अबोध बच्ची रह गई है, जिसे शायद यह भी नहीं पता कि उसके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे।

3. **अरुण कुमार (45):** अरुण पेशे से एक ऑटो चालक थे और कड़ी मेहनत से अपने घर का गुजारा कर रहे थे। हालांकि उनकी कोई संतान नहीं थी, लेकिन वे अपने परिवार और गांव के सबसे चहेते सदस्यों में से एक थे।

4. **सुशील कुमार (46):** सुशील एक दिहाड़ीदार कामगार थे। उनकी दो छोटी बेटियां (8 और 10 साल) अब पूरी तरह बेसहारा हो गई हैं।


### **दुबई जाने वाला युवक घायल**


जिस अमृत डडवाल को फ्लाइट पकड़ाने के लिए यह सब निकले थे, वह इस हादसे में गंभीर रूप से **Injured** हुआ है। उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन शारीरिक चोटों से ज्यादा गहरा जख्म उसे इस बात का लगा है कि उसके चार दोस्त उसे छोड़ने के चक्कर में अपनी जान गंवा बैठे।


### **प्रशासनिक ढिलाई और सुरक्षा पर सवाल**


हादसे के बाद इलाके में भारी रोष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्दियों के दौरान पंजाब और हिमाचल की सीमाओं पर धुंध के कारण **Visibility** बहुत कम हो जाती है, लेकिन इसके बावजूद भारी वाहनों (Heavy Vehicles) की गति पर कोई नियंत्रण नहीं है। पुलिस ने मामले की **Investigation** शुरू कर दी है और बस चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने का मामला दर्ज कर लिया गया है।


### **अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब**


आज दोपहर जब चारों शवों का पोस्टमार्टम होने के बाद उन्हें चलेट गांव लाया गया, तो पूरे क्षेत्र में चीख-पुकार मच गई। अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस दुख की घड़ी में शोक व्यक्त किया है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि इन गरीब परिवारों के लिए विशेष **Relief Package** की घोषणा की जाए, क्योंकि घर चलाने वाले सदस्य अब नहीं रहे।


### **सड़क सुरक्षा की अपील**


यह हादसा हमें फिर से याद दिलाता है कि सर्दियों के मौसम में **Safety Measures** कितने जरूरी हैं। पुलिस विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि धुंध के दौरान ड्राइविंग करते समय हमेशा **Fog Lights** और इंडिकेटर्स का उपयोग करें और गति सीमा का सख्ती से पालन करें।


 चलेट गांव की यह घटना हिमाचल के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक के रूप में याद रखी जाएगी। चार युवाओं की मौत ने न केवल चार घरों को उजाड़ा है, बल्कि पूरे समाज को एक गहरा जख्म दिया है जिसकी भरपाई नामुमकिन है।


Post a Comment

Previous Post Next Post

Contact Form